एक बार की बात है, एलेक्स नाम का एक प्यारा सा बच्चा था। उसके बाल भूरे, आँखें बादामी रंग की थीं और वह हमेशा थोड़ी शरारती मुस्कान रखता था। वह अक्सर अपनी पुरानी, लेकिन आरामदायक नीली टी-शर्ट और जीन्स में रहता था, जिस पर उसके पसंदीदा कार्टून के निशान थे। एलेक्स थोड़ा झिझकता था, उसे लगता था कि वह किसी खास काम के लिए नहीं बना, लेकिन उसके दिल में दयालुता बहुत भरी थी।
एक दिन, स्कूल की छुट्टी होने वाली थी। एलेक्स को अपनी खोई हुई पेंसिल केस ढूंढने के लिए स्कूल की बेसमेंट में जाना पड़ा। स्कूल की बेसमेंट थोड़ी डरावनी और धूल भरी थी, लेकिन एलेक्स को अपनी पेंसिल केस ढूंढनी ही थी। वह सीढ़ियों से नीचे उतरा, जहाँ पुरानी मेज़ें और टूटी कुर्सियाँ पड़ी थीं। हवा में एक अजीब सी गंध थी, जैसे पुरानी किताबों और धूल का मिश्रण।
जैसे ही वह एक कोने की ओर बढ़ा, उसकी नज़र एक बड़े, जंग लगे लोहे के दरवाजे पर पड़ी। यह दरवाजा बाकी सभी दरवाजों से अलग था। उस पर कोई हैंडल नहीं था, बस एक अजीब सा निशान बना था – एक चमकता हुआ तारा जो एक दिल के बीच से गुजर रहा था। एलेक्स उत्सुक हुआ। उसने धीरे से उस दरवाजे को छुआ। जैसे ही उसकी उँगलियाँ निशान से टकराईं, एक हल्की सी कंपन हुई और दरवाजा धीरे से, बिना आवाज़ किए, खुलने लगा। अंदर एक चमकदार रोशनी थी, जिसने उसकी आँखों को चौंधिया दिया।
एलेक्स ने डरते-डरते अंदर झाँका। यह कोई साधारण कमरा नहीं था। चारों ओर रंग-बिरंगे मैट बिछे थे। दीवार पर एक बड़ा सा ‘दयालुता मीटर’ लगा था, जिसमें हरे, पीले और लाल रंग की लाइटें लगी थीं। एक कोने में छोटे-छोटे अभ्यास स्टेशन थे, और दूसरे कोने में रंगीन तालों वाले लॉकर। हवा में एक सुखद, ताज़ी गंध थी, जैसे खिले हुए फूलों की। यह एक रहस्यमय और अद्भुत जगह थी।
तभी, एक ऊँची, लेकिन दयालु आवाज़ गूँजी, "अरे वाह! आखिरकार, तुम आ ही गए, एलेक्स!" एलेक्स चौंक गया। उसने देखा कि एक शानदार महिला उसकी ओर मुस्कुराते हुए आ रही थी। उनके बाल छोटे और चाँदी जैसे चमकीले थे, और उनकी आँखें नीली और हर पल चमकती रहती थीं। उन्होंने एक चमकदार सफेद वर्दी पहनी थी, जिस पर वही चमकता तारा बना था जो दरवाजे पर था। यह थी कोच ब्राइट। उनके चेहरे पर हमेशा एक आत्मविश्वास भरी मुस्कान रहती थी। वह बहुत ऊर्जावान और उत्साहित थीं।
कोच ब्राइट ने एलेक्स का हाथ पकड़ा और उसे अंदर खींच लिया। "घबराओ मत, छोटे हीरो! यह है गुप्त प्रशिक्षण कक्ष, जहाँ आम बच्चे रोज़मर्रा के हीरो बनते हैं।" एलेक्स अभी भी हैरान था। "मैं... मैं हीरो? लेकिन मैं तो बस एलेक्स हूँ," उसने हिचकिचाते हुए कहा। कोच ब्राइट हँसीं। "यहीं तो बात है, एलेक्स! हर हीरो की शुरुआत कहीं न कहीं से तो होती है। और तुम्हारी शुरुआत यहाँ से होगी। यह जगह तुम्हें बताएगी कि असली सुपरपावर सिर्फ शक्ति नहीं, बल्कि दयालुता है।"
तभी, एक छोटी सी भिनभिनाहट के साथ, एक रोबोट हवा में तैरता हुआ उनके पास आया। यह एक छोटा, गोल-मटोल रोबोट था जिसके चार छोटे पंख थे और उसकी एक नीली चमकती हुई आँख थी। यह था बी-बॉट। "नमस्ते, एलेक्स!" बी-बॉट ने एक मधुर, यांत्रिक आवाज़ में कहा। "मैं तुम्हारा अभ्यास साथी हूँ। मेरा काम तुम्हें हर चुनौती में मदद करना और तुम्हारा मनोबल बढ़ाना है।" एलेक्स ने बी-बॉट को उत्सुकता से देखा, उसकी हैरानी बढ़ती जा रही थी।
कोच ब्राइट ने समझाया, "यह प्रशिक्षण हर दिन एक नई चुनौती के साथ आता है। हमारा लक्ष्य है कि तुम सीखो कि छोटी-छोटी चीज़ें भी कैसे बड़ा बदलाव ला सकती हैं।" उन्होंने दीवार पर लगे ‘दयालुता मीटर’ की ओर इशारा किया। "हर बार जब तुम कोई अच्छा काम करोगे, यह मीटर ऊपर जाएगा। हमारा लक्ष्य है इसे भरा हुआ रखना!"
आज की पहली चुनौती ‘गुमशुदा खिलौना’ थी। एक छोटी तस्वीर एक बेंच पर अकेले बैठे एक बच्चे की थी, जिसका खिलौना खो गया था। कोच ब्राइट ने बताया, "देखो, एलेक्स। इस बच्चे का नाम रिया है। उसने अपना पसंदीदा टेडी बियर खो दिया है। तुम्हारा काम है उसे ढूंढने में मदद करना। दिखने में यह आसान लगता है, लेकिन असल ज़िन्दगी में ऐसे मौके पहचानना मुश्किल होता है।" बी-बॉट ने एक छोटा सा टैबलेट एलेक्स की ओर बढ़ाया, जिस पर एक विस्तृत नक्शा था जिसमें पार्क की एक तस्वीर और कुछ संभावित स्थान दिखाए गए थे जहाँ खिलौना हो सकता था।
एलेक्स ने नक्शे को ध्यान से देखा। "लेकिन... मुझे कैसे पता चलेगा कि यह कहाँ है?" उसने पूछा। कोच ब्राइट मुस्कुराईं। "यही तो तुम्हारी पहली सुपरपावर है - अवलोकन! तुम्हें ध्यान से देखना होगा, छोटे-छोटे सुरागों को समझना होगा। सोचो, रिया अपने टेडी बियर को कहाँ ले जा सकती थी? कौन सी चीज़ें उसे पसंद होंगी?" बी-बॉट ने कहा, "हम तुम्हें पार्कों की संभावित तस्वीरों में से रिया के टेडी बियर जैसे खिलौने दिखा सकते हैं, एलेक्स।" एलेक्स ने अपनी आँखें बंद कीं और सोचना शुरू किया। उसे याद आया कि उसकी छोटी बहन अपने टेडी बियर को हमेशा अपने साथ आइसक्रीम खाने ले जाती थी। आइसक्रीम स्टॉल? या शायद बच्चों की स्लाइड्स के पास?
एलेक्स ने अपनी आँखें खोलीं और कहा, "कोच, आइसक्रीम स्टॉल के पास देखिए या फिर स्लाइड्स के पास! वह शायद आइसक्रीम खाते हुए भूल गई होगी या खेलते हुए गिर गया होगा।" बी-बॉट ने तुरंत नक्शे पर उन स्थानों को चिह्नित किया। कोच ब्राइट ने हाँ में सिर हिलाया। "बहुत खूब, एलेक्स! यह एक अच्छी सोच है। अब, अगली बार जब तुम बाहर जाओ, तो अपनी आँखों और दिमाग को खुला रखना।" दयालुता मीटर पर एक छोटी सी हरी लाइट जली। एलेक्स के चेहरे पर पहली बार एक आत्मविश्वास भरी मुस्कान आई।
अगले दिन, एलेक्स स्कूल से लौट रहा था। वह अपने दिमाग में कोच ब्राइट की बातें दोहरा रहा था, 'अवलोकन, अवलोकन!' तभी उसकी नज़र पार्क में एक बेंच पर पड़ी। एक छोटी लड़की उदास बैठी थी। उसके सामने एक आइसक्रीम गिरकर पिघल रही थी और उसके हाथ में एक टेडी बियर नहीं था। एलेक्स को तुरंत याद आया कि रिया का टेडी बियर भी कहीं खो गया था। यह वही लड़की थी! उसने हिम्मत करके उससे बात करने का फैसला किया।
"क्या तुम रिया हो?" एलेक्स ने धीरे से पूछा। लड़की ने सिर उठाया, उसकी आँखों में आँसू थे। "हाँ..." उसने फुसफुसाया। "मेरा टेडी बियर खो गया है। और मेरी आइसक्रीम भी गिर गई।" एलेक्स का दिल पिघल गया। यह वही पल था जिसके बारे में कोच ब्राइट ने बताया था। उसने तुरंत अपनी जेब से एक साफ रुमाल निकाला और रिया को दिया। "चिंता मत करो, रिया। हम तुम्हारा टेडी बियर ढूंढ लेंगे। क्या तुम्हें याद है तुमने उसे कहाँ देखा था?" रिया ने अपनी आँखे पोंछी। "मैं स्लाइड से खेल रही थी और फिर मैं आइसक्रीम खाने आई थी... शायद वहीं कहीं गिर गया होगा।"
एलेक्स ने तुरंत स्लाइड की ओर दौड़ लगाई। वह ध्यान से देखने लगा। झाड़ियों के पास, कुछ रेत के ढेर में... और तभी! उसने एक भूरे रंग का टेडी बियर देखा, जिसका एक पैर थोड़ा बाहर निकला हुआ था। "मिल गया!" उसने चिल्लाया। रिया की आँखें चमक उठीं। वह खुशी से उछली और अपने टेडी बियर को गले लगा लिया। "बहुत-बहुत धन्यवाद!" उसने एलेक्स को गले लगा लिया। एलेक्स को लगा जैसे उसने कोई बहुत बड़ा काम कर दिया हो। उसके दिल में एक अजीब सी खुशी भर गई।
उस रात जब एलेक्स वापस रहस्यमय प्रशिक्षण कक्ष में आया, तो दयालुता मीटर पूरी तरह से हरा हो गया था और चमक रहा था। कोच ब्राइट और बी-बॉट वहीं इंतज़ार कर रहे थे। "शानदार काम, एलेक्स!" कोच ब्राइट ने कहा। "तुम्हारा अवलोकन कौशल अद्भुत है। तुमने सिर्फ खिलौना नहीं ढूंढा, बल्कि एक उदास चेहरे पर मुस्कान भी बिखेरी।" बी-बॉट ने एक छोटी सी खुशी की धुन बजाई और एलेक्स को एक छोटा सा स्टिकर दिया जिस पर चमकता तारा बना था।
अगली चुनौती थी ‘अदृश्य दीवार’। कोच ब्राइट ने समझाया, "कभी-कभी लोगों को ऐसी मदद की ज़रूरत होती है जो दिखती नहीं है। लोग चुपचाप परेशान होते हैं। तुम्हें उनकी मदद करनी है बिना उनसे पूछे।" उन्होंने एक खाली कुर्सी और एक खाली मेज़ की तस्वीर दिखाई जिस पर बहुत सारी किताबें और एक टूटा हुआ चश्मा पड़ा था। "यह मिस्टर शर्मा की मेज़ है। वह एक बहुत ही बिज़ी प्रोफेसर हैं जिनकी नज़र कमज़ोर हो गई है, लेकिन वह किसी से मदद नहीं मांगते। तुम्हें उनकी मदद करनी है, बिना उन्हें यह बताए कि तुम क्या कर रहे हो।" बी-बॉट ने एक सिमुलेशन शुरू किया, जिसमें मिस्टर शर्मा वर्चुअल क्लासरूम में बैठे थे, किताबों के ढेर में खोए हुए और अपने चश्मे को ढूंढ रहे थे।
एलेक्स ने सोचा। "बिना बताए मदद? यह कैसे संभव है?" कोच ब्राइट ने समझाया, "तुम्हें अदृश्य होना है, एलेक्स। न शारीरिक रूप से, बल्कि अपनी मदद को अदृश्य रखना है। सोचो, उनकी क्या ज़रूरत हो सकती है जो तुम्हें दिखती तो नहीं, लेकिन तुम महसूस कर सकते हो?" बी-बॉट ने संकेत दिया, "क्या वे अक्सर कोई चीज़ भूल जाते हैं? क्या उनकी मेज़ अक्सर बिखरी रहती है?" एलेक्स को याद आया कि मिस्टर शर्मा अक्सर अपनी चाबियाँ या पेन खो देते थे, और उनकी मेज़ हमेशा फैली रहती थी।
"मैं समझ गया!" एलेक्स ने कहा। "उनकी मेज़ को व्यवस्थित करना और उनके अक्सर खोने वाली चीज़ों को एक जगह रखना।" कोच ब्राइट ने ताली बजाई। "बिल्कुल सही! यह है सहानुभूति, एलेक्स। दूसरों की ज़रूरतों को समझना, भले ही वे उन्हें बताएं नहीं।" दयालुता मीटर पर एक और हरी लाइट जली।
अगले दिन, स्कूल के बाद, एलेक्स ने मिस्टर शर्मा के खाली क्लासरूम में झाँका। वहाँ कोई नहीं था। उसने अंदर जाकर उनकी बिखरी हुई मेज़ को देखा। किताबों का ढेर, कागज़ात फैले हुए, और टूटा हुआ चश्मा एक कोने में पड़ा था। एलेक्स ने धीरे-धीरे किताबों को जमाया, कागज़ात को सही जगह पर रखा, और टूटे हुए चश्मे को एक छोटे डिब्बे में संभाल कर रख दिया ताकि मिस्टर शर्मा को पता चले कि यह ठीक हो सकता है। यह सब करते हुए उसे बहुत ध्यान रखना पड़ा कि कोई उसे देख न ले। उसने पेन और पेंसिल को एक कप में रखा, और चाबियों के लिए एक छोटा सा हुक दीवार पर लगा दिया। यह एक छोटा सा काम था, लेकिन यह उसे बहुत अच्छा महसूस करवा रहा था।
जब मिस्टर शर्मा अगली सुबह क्लास में आए, तो उन्होंने देखा कि उनकी मेज़ व्यवस्थित है। उनका चश्मा भी एक डिब्बे में सुरक्षित रखा हुआ है। उनकी भौंहें चढ़ गईं, फिर उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई। उन्होंने सोचा कि शायद किसी सफाईकर्मी ने ऐसा किया होगा, लेकिन उनके दिल में एक सुखद अहसास हुआ।
उस रात, दयालुता मीटर फिर से चमक रहा था। कोच ब्राइट ने कहा, "तुमने शानदार काम किया, एलेक्स। मिस्टर शर्मा के चेहरे पर जो राहत थी, उसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं था। तुमने उन्हें बिना कुछ कहे मदद की। यह असली अदृश्य दीवार को तोड़ना है।" एलेक्स को अब खुद पर थोड़ा गर्व महसूस हो रहा था। बी-बॉट ने एक और स्टिकर दिया।
अगली चुनौती थी ‘विचारों की उड़ान’। कोच ब्राइट ने कहा, "कभी-कभी, लोगों को सिर्फ एक अच्छे विचार की ज़रूरत होती है। उन्हें लगता है कि वे अटक गए हैं। तुम्हारा काम है उन्हें एक नया रास्ता दिखाना, उन्हें प्रेरित करना।" उन्होंने एक लड़के की तस्वीर दिखाई जो एक पुरानी, टूटी हुई साइकिल के पास उदास बैठा था। "यह रवि है। वह बहुत गरीब है और उसके पास नई साइकिल खरीदने के पैसे नहीं हैं। उसे स्कूल जाने में देर हो रही है। तुम्हें उसे एक ऐसा विचार देना है जिससे उसकी समस्या हल हो जाए।" बी-बॉट ने बताया कि रवि साइकिल को खुद ठीक करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे पता नहीं था कैसे।
एलेक्स ने सोचा। "अगर उसके पास पैसे नहीं हैं, तो वह नई साइकिल कैसे खरीदेगा? और अगर वह ठीक करना नहीं जानता..." कोच ब्राइट ने कहा, "तुम एक विचार देने वाले हीरो हो, एलेक्स। उसे यह मत बताओ कि क्या करना है, बल्कि उसे ऐसा रास्ता दिखाओ जिससे वह खुद समाधान ढूंढ ले।" बी-बॉट ने कुछ आस-पड़ोस की गतिविधियों के बारे में बताया, जैसे कि लोगों के लिए किराने का सामान लाना या छोटे-मोटे काम करना।
एलेक्स के दिमाग में एक विचार आया। "कोच! वह आस-पड़ोस के बूढ़े लोगों की मदद कर सकता है। उनके लिए किराने का सामान ले जा सकता है, या उनके बगीचे की देखभाल कर सकता है। बदले में, वे उसे थोड़े पैसे दे सकते हैं या कोई उसे साइकिल ठीक करना सिखा सकता है।" कोच ब्राइट खुशी से उछलीं। "उत्कृष्ट विचार, एलेक्स! तुमने रवि को एक रास्ता दिखाया है, न कि उसे समाधान दिया है। तुमने उसे आत्मनिर्भर होने का मौका दिया है।" दयालुता मीटर और ऊपर चढ़ा।
अगले दिन एलेक्स ने देखा कि रवि अपनी टूटी हुई साइकिल के पास उदास बैठा है। एलेक्स उसके पास गया। "रवि, क्या तुम बूढ़े लोगों की मदद करना चाहोगे? जैसे उनके लिए सामान लाना या उनके पौधों को पानी देना?" रवि ने एलेक्स को हैरानी से देखा। "मुझे पैसे की ज़रूरत है..." एलेक्स ने कहा, "हो सकता है कि वे तुम्हें बदले में कुछ पैसे दें, या तुम्हें साइकिल ठीक करना सिखाने में मदद करें?" रवि ने सोचा। "हाँ! मैं कोशिश कर सकता हूँ!" रवि के चेहरे पर एक नई उम्मीद दिखी। कुछ दिनों बाद, एलेक्स ने देखा कि रवि एक बूढ़ी महिला के बगीचे से पानी दे रहा था और उसकी साइकिल भी ठीक होने लगी थी। यह एक धीमा बदलाव था, लेकिन यह हो रहा था।
दयालुता मीटर अब लगभग भरा हुआ था, बस थोड़ी सी जगह बाकी थी। एलेक्स को अब सच में एक हीरो जैसा लग रहा था।
अंतिम चुनौती ‘टीमवर्क टर्बो’ थी। कोच ब्राइट ने कहा, "एलेक्स, अब तक तुमने अद्भुत काम किया है। लेकिन असली हीरो वह है जो दूसरों के साथ मिलकर काम करता है। कभी-कभी हमें दूसरों की मदद की भी ज़रूरत पड़ती है।" उन्होंने एक बड़ी पहेली की तस्वीर दिखाई, जिसमें बहुत सारे रंग-बिरंगे टुकड़े थे। "यह पहेली एक बच्चे की है जो अकेला महसूस कर रहा है, और तुम्हें उसे फिर से दोस्त बनाने में मदद करनी है।" बी-बॉट ने बताया कि इस पहेली में कुछ टुकड़े गायब थे, और उन्हें ढूंढने के लिए अलग-अलग कौशल वाले लोगों की ज़रूरत थी।
एलेक्स ने सोचा। उसे कौन मदद कर सकता था? उसे याद आया कि उसकी क्लास में एक लड़की थी, मीरा, जो बहुत अच्छी चित्रकार थी, और एक लड़का, करण, जो हमेशा चीज़ों को इकट्ठा करने में माहिर था। "कोच, क्या मैं मीरा और करण को बुला सकता हूँ? मीरा पहेली के गायब टुकड़ों के चित्र बना सकती है और करण उन्हें ढूंढ सकता है!" कोच ब्राइट मुस्कुराईं। "बिल्कुल, एलेक्स! यही तो है टीमवर्क। हर कोई अपनी ताक़त का इस्तेमाल करता है।" दयालुता मीटर पूरी तरह से हरा हो गया और एक चमकीली आवाज़ हुई, जैसे उसने कोई बहुत बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया हो।
उस रात, एलेक्स ने मीरा और करण को बुलाया और उन्हें रहस्यमय प्रशिक्षण कक्ष में लाया। वह उन दोनों को इस गुप्त दुनिया के बारे में बताता देख उत्साहित था। मीरा ने कहा, "वाह! यह तो बहुत अद्भुत जगह है!" करण ने हर उपकरण को छूकर देखा। कोच ब्राइट और बी-बॉट ने उन्हें चुनौती समझाई। तीनों ने मिलकर काम करना शुरू किया। मीरा ने तुरंत गायब टुकड़ों के चित्र बनाए, करण ने अपनी तेज़ी से उन्हें ढूँढा, और एलेक्स ने उन्हें सही जगह पर लगाया। कुछ ही समय में, पहेली पूरी हो गई। पहेली में एक बड़ी, खुश, मुस्कुराती हुई सूरज की तस्वीर थी।
जैसे ही पहेली पूरी हुई, दयालुता मीटर से एक बड़ा, चमकता हुआ तारा निकला और हवा में तैरने लगा। कोच ब्राइट ने तीनों को गले लगा लिया। "तुम सभी अद्भुत हो! तुम अब सिर्फ़ एलेक्स, मीरा और करण नहीं, बल्कि टीम दयालुता हो! तुमने दिखाया है कि मिलकर काम करने से कुछ भी असंभव नहीं है।"
एलेक्स ने अब खुद को पहले से कहीं ज़्यादा आत्मविश्वासी महसूस किया। उसे लगा कि वह अब अकेला नहीं है, और उसकी दयालुता एक असली शक्ति बन गई है। उसने सीखा कि सुपरपावर आसमान में उड़ना या अदृश्य होना नहीं है, बल्कि दूसरों की मदद करना, दूसरों की ज़रूरतों को समझना और मिलकर काम करना है। यह सबसे बड़ी सुपरपावर थी। और यह सुपरपावर हमेशा उसके साथ रहेगी, चाहे वह स्कूल में हो, पार्क में हो या कहीं भी हो। वह जान गया था कि सच्चा हीरो वही होता है जो अपने दिल में दयालुता रखता है।