एक शांत पेड़ था, जिसकी शाखाएँ बहुत मजबूत थीं। यह पेड़ एक खुले आसमान के नीचे खड़ा था। आसमान बड़ा नीला था, और उस पर बादल धीरे-धीरे तैरते थे। पेड़ की पत्तियाँ हरे रंग की थीं, और उन पर सूरज की रोशनी मुलायम लगती थी। सब कुछ बहुत शांत और प्यारा था। यह एक ऐसी जगह थी जहाँ जादू हो सकता था, और जहाँ छोटे-छोटे पंछी खुशी से रहते थे।
इसी पेड़ पर एक छोटा पीला पंछी बैठा था। उसका नाम था 'पीकू'। पीकू के पंख बहुत छोटे और सीधे थे, और उसका शरीर एकदम गोल था। उसकी आँखें बड़ी और गहरी काली थीं, और जब वह मुस्कुराता था, तो उसकी मुस्कान बहुत प्यारी लगती थी। पीकू हमेशा शांत रहता था और बहुत धैर्यवान था। वह अपने गोल शरीर और चमकदार पीली रंगत के साथ, किसी सुंदर खिलौने जैसा दिखता था। वह हमेशा ध्यान से देखता था और कभी जल्दी नहीं करता था। पीकू एक ऐसा पंछी था जिसे बच्चे देखते ही प्यार करते थे। वह अपने आस-पास की दुनिया को बहुत ध्यान से देखता था, पेड़ों को, फूलों को और उड़ती हुई तितलियों को। वह अपनी छोटी सी जगह में बहुत खुश रहता था, जहाँ पत्तियाँ उसे धीरे-धीरे सहलाती थीं, और सूरज की गरमाहट उसे अच्छा महसूस कराती थी।
एक दिन, पीकू उड़ना चाहता था। उसने अपने छोटे पंख फड़फड़ाए। लेकिन उसने देखा कि आज हवा बहुत तेज थी। पत्ते नाच रहे थे, और पेड़ की शाखाएँ हिल रही थीं। पीकू जानता था कि तेज हवा में उड़ना मुश्किल हो सकता है। यह खतरनाक भी हो सकता था। उसने सोचा, "आज उड़ना ठीक नहीं है।" वह एक मजबूत शाखा पर चुपचाप बैठ गया। पीकू ने अपने आपको शांत रखा। उसने अपनी आँखों को आसमान पर टिकाया। उसने देखा कि बादल कितनी तेजी से भाग रहे थे। उसने महसूस किया कि कैसे हवा उसके छोटे-छोटे पंखों को छूकर निकल रही थी। उसने एक गहरी साँस ली, और फिर धीरे से छोड़ दी। उसने सोचा, "मुझे बस इंतजार करना होगा।" कुछ देर के लिए, उसे थोड़ी बेचैनी हुई। उसे सचमुच उड़ना पसंद था! उड़ना उसे बहुत खुशी देता था, ऊपर आसमान में, बादलों के पास। वह अपनी छोटी सी जगह से दूर, नई जगहें देखना चाहता था। लेकिन उसने खुद को रोका। उसने सोचा, "सुरक्षा पहले।" उसने अपनी छोटी सी चोंच को अपनी छाती पर रखा, और शांति से इंतजार किया।
कुछ समय बीत गया। हवा धीरे-धीरे धीमी होने लगी। पत्तियों का नाचना कम हो गया। शाखाएँ अब उतनी जोर से नहीं हिल रही थीं। पीकू ने फिर से आसमान की तरफ देखा। बादल अब और धीरे-धीरे चल रहे थे। हवा अब बहुत हल्की लग रही थी। पीकू के मन में एक खुशी की लहर दौड़ गई। उसने अपने छोटे पंखों को फैलाया। इस बार, हवा उसे सहारा दे रही थी, उसे ऊपर उठाने में मदद कर रही थी। उसने एक छोटा सा कूदने जैसा काम किया, और फिर हवा में तैरने लगा। वह पंखों को धीरे-धीरे हिला रहा था। वह ऊपर और ऊपर उड़ता गया, नीला आसमान उसके सामने खुल रहा था। वह पेड़ों के ऊपर से उड़ रहा था, और नीचे सब कुछ छोटा-छोटा दिख रहा था। पीकू बहुत खुश था। उसने एक गाना गाया, एक प्यारा सा गीत जो खुशी से भरा था। उसने सीखा था कि इंतजार करना अच्छा होता है। सब्र से काम लेना हमेशा सही होता है।
एक दिन, पीकू ने एक नया फल देखा। वह एक पेड़ पर था, जो थोड़ा दूर था। फल गोल था और लाल रंग का था। पीकू को भूख लगी थी। वह फल खाना चाहता था। उसने सोचा, “मैं अभी उड़कर जाऊंगा और फल ले आऊंगा।” वह कूदने वाला था, लेकिन फिर उसने रुककर देखा। पेड़ की शाखा पतली थी। उस पर जाकर फल तोड़ना थोड़ा मुश्किल लग रहा था। पीकू ने सोचा, “अगर मैं जल्दी करूंगा, तो मैं नीचे गिर सकता हूँ।” उसने एक गहरी साँस ली। उसने याद किया कि कैसे उसने हवा के तेज होने पर इंतजार किया था। उसने धीरे-धीरे सोचा, “मुझे एक बेहतर तरीका ढूंढना होगा।”
पीकू ने चारों ओर देखा। उसने देखा कि पेड़ के तने पर एक बड़ी बेला चढ़ी हुई थी। बेला बहुत मजबूत दिख रही थी। वह ऊपर की ओर जा रही थी, सीधे उस फल तक। पीकू के मन में एक विचार आया। उसने सोचा, “मैं बेला के सहारे जा सकता हूँ।” यह उड़ने से ज्यादा सुरक्षित होगा। उसने अपने छोटे-छोटे पंजों से बेला को पकड़ा। वह धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा। एक छोटा कदम, फिर दूसरा छोटा कदम। वह थोड़ा फिसल गया, लेकिन उसने फिर से पकड़ लिया। यह मुश्किल तो था, लेकिन वह हार नहीं माना। वह जानता था कि उसे फल खाना है, और वह जानता था कि सही तरीके से काम करना जरूरी है। उसने अपनी छोटी उंगलियों से बेला को मजबूती से पकड़ा। उसकी छोटी सी दिल की धड़कन तेज हो रही थी, लेकिन वह शांत रहने की कोशिश कर रहा था।
जब वह फल के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि फल थोड़ा ऊपर था। पीकू अपनी छोटी सी जगह से पहुँच नहीं पा रहा था। उसने सोचा, “ओह, यह थोड़ा मुश्किल है।” उसने फिर से सोचा। पीकू ने अपनी छोटी सी चोंच से एक पत्ती को तोड़ा। पत्ती थोड़ी बड़ी थी। उसने पत्ती को अपनी चोंच में पकड़ा। फिर उसने पत्ती का उपयोग एक छोटे से धक्का देने वाले औजार की तरह किया। उसने पत्ती से फल को धीरे से धकेला। फल थोड़ा हिल गया, और फिर ‘टप’ करके नीचे गिर गया। पीकू ने खुशी से उछल पड़ा! उसने जल्दी से नीचे जाकर फल को उठाया। फल बहुत मीठा था और स्वादिष्ट था। पीकू ने खुशी-खुशी फल खाया। उसने सीखा था कि समस्याओं को हल करने के लिए सोचने का समय लेना चाहिए। कभी-कभी हमें थोड़ा और सोचना पड़ता है, और कभी-कभी हमें नए तरीके खोजने पड़ते हैं।
एक बार, पीकू ने देखा कि एक छोटी तितली शाखा पर फंसी हुई थी। तितली के पंख एक जाले में फंस गए थे। तितली बहुत डर गई थी और फड़फड़ा रही थी। पीकू थोड़ा डरा हुआ था। मकड़ी का जाला बहुत चिपचिपा था। उसने सोचा, “मैं क्या करूं?” वह तितली की मदद करना चाहता था, लेकिन उसे पता नहीं था कि कैसे। उसने सोचा, “अगर मैं ऐसे ही उसे खींचूंगा, तो उसके पंख टूट सकते हैं।” उसने फिर से शांत रहने की कोशिश की।
पीकू ने चारों ओर देखा। उसने देखा कि पास में एक छोटी सी बूंद थी, जो एक फूल की पत्ती पर चमक रही थी। वह बारिश की बूंद थी। उसके मन में एक विचार आया। उसने सोचा, “पानी जाले को कमजोर कर सकता है।” उसने अपनी चोंच में थोड़ी सी पानी की बूंद ली। यह थोड़ा अजीब काम था, लेकिन उसने कोशिश की। वह धीरे से तितली के पास गया। तितली अभी भी डरी हुई थी। पीकू ने धीरे-धीरे पानी की बूंद को जाले पर गिराया। जाला थोड़ा ढीला होने लगा। पीकू ने और बूंदें डालीं। जाला अब उतना चिपचिपा नहीं लग रहा था।
अब, पीकू ने अपनी छोटी सी चोंच का इस्तेमाल किया। उसने धीरे से जाले के धागे को एक तरफ हटाया। वह बहुत सावधान था। उसने धीरे-धीरे तितली के पंखों को आज़ाद किया। यह एक मुश्किल काम था, जिसमें बहुत धैर्य की जरूरत थी। अंत में, तितली के पंख जाले से मुक्त हो गए। तितली ने अपने पंख फड़फड़ाए और उड़ गई। उसने पीकू की तरफ देखकर 'धन्यवाद' कहा, जैसे कि वह मुस्कुरा रही हो। पीकू बहुत खुश था। उसने सीखा था कि दूसरों की मदद करने के लिए भी हमें सोचना पड़ता है। हमें समझना पड़ता है कि सबसे अच्छा तरीका क्या है। कभी-कभी हमें थोड़ी हिम्मत दिखानी पड़ती है, और कभी-कभी हमें नए विचार सोचने पड़ते हैं। पीकू ने हर दिन कुछ नया सीखा। वह जानता था कि चाहे कितनी भी मुश्किल हो, इंतजार करना और धैर्य रखना हमेशा सही होता है। उसने यह भी सीखा कि अगर आप ध्यान से सोचते हैं, तो आप किसी भी समस्या का हल ढूंढ सकते हैं। और सबसे महत्वपूर्ण बात, उसने यह सीखा कि मदद करना और दयालु होना बहुत अच्छा लगता है। और इस तरह, पीकू, छोटा पीला पंछी, अपनी मजबूत शाखा पर खुशी से रहता था, हमेशा कुछ नया सीखने के लिए तैयार!
पीकू एक दिन अपनी मजबूत शाखा पर बैठा धूप का आनंद ले रहा था। पत्तियाँ धीरे-धीरे हवा के साथ झूम रही थीं। उसने देखा कि बहुत सारे छोटे पक्षी, तितलियाँ, और गिलहरियाँ उसके पेड़ के पास खेलने आ रहे थे। वे सब बहुत खुश थे, नाच रहे थे और गा रहे थे। पीकू भी उनके साथ खेलना चाहता था। लेकिन उसे याद आया कि एक बार जब वह थोड़ा जल्दी था, तो वह एक ऊंची शाखा से फिसल गया था। उसने सोचा, "मुझे धीरे से खेलना चाहिए।"
उसने सबसे पहले गिलहरी को खेलते देखा। गिलहरी तेजी से पेड़ के तने पर दौड़ रही थी। वह ऊपर और नीचे जा रही थी, बहुत तेजी से। पीकू ने सोचा, "मैं गिलहरी जितनी तेजी से नहीं दौड़ सकता।" फिर उसने तितलियों को देखा। तितलियाँ फूलों के ऊपर उड़ रही थीं, उनके पंख सुंदर रंगों में चमक रहे थे। पीकू ने सोचा, "मैं तितली की तरह नाच नहीं सकता।"
पीकू ने सोचा, "मैं क्या अच्छा कर सकता हूँ?" उसने अपनी छोटी सी चोंच को अपनी छाती पर रखा। उसने फिर से याद किया कि कैसे उसने तेज हवा में इंतजार किया था, और कैसे उसने फल तोड़ने के लिए पत्ती का इस्तेमाल किया था। उसने सोचा, "मुझे हमेशा सोचना पड़ता है।"
फिर उसने देखा कि कुछ छोटे पक्षी जमीन पर दाना चुन रहे थे। एक छोटा दाना एक पत्थर के नीचे फंसा हुआ था। पक्षी उसे निकालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वह नहीं निकल रहा था। वे हार मान रहे थे। पीकू के मन में फिर एक विचार आया। उसने सोचा, "मैं उनकी मदद कर सकता हूँ।"
पीकू अपनी शाखा से धीरे से नीचे उड़ गया। वह उस पत्थर के पास गया जहाँ दाना फंसा हुआ था। छोटे पक्षियों ने उसे देखा। वे थोड़े हैरान हुए। पीकू ने अपनी छोटी सी चोंच से पत्थर को धीरे से खिसकाने की कोशिश की। पत्थर थोड़ा भारी था। वह एक बार में नहीं हिला। पीकू ने थोड़ी और कोशिश की। उसने अपनी चोंच को मजबूती से पत्थर के नीचे डाला, और फिर अपने शरीर का उपयोग करके उसे धक्का दिया। 'हट!' करके पत्थर थोड़ा खिसक गया। दाना अब दिख रहा था।
छोटे पक्षी बहुत खुश हुए! उन्होंने 'चीं-चीं' करके पीकू को धन्यवाद दिया। पीकू भी बहुत खुश था। वह जानता था कि उसने सही काम किया है। उसने सीखा कि हर किसी के अंदर अपनी एक खास शक्ति होती है। उसकी शक्ति थी धैर्य और बुद्धि का उपयोग करना। वह दूसरों की मदद करने में अच्छा था।
अब, पीकू ने अपने दोस्त बनाए थे। छोटे पक्षी उसके साथ खेलने आते थे। वह कभी-कभी उन्हें सिखाता था कि शांत रहकर कैसे सोचना चाहिए। कभी-कभी वे उसे सिखाते थे कि कैसे तेजी से दाना ढूंढना है। पीकू ने हमेशा अपने दोस्तों को बताया, "इंतजार करना अच्छा है, और सोचना बहुत अच्छा है।" उसने उन्हें बताया, "जब हवा तेज हो, तो उड़ो मत। जब कोई चीज मुश्किल हो, तो आराम से सोचो।" और हर कोई पीकू की बात सुनता था, क्योंकि वे जानते थे कि पीकू हमेशा सही सलाह देता था।
और इस तरह, पीकू, छोटा पीला पंछी, उस शांत पेड़ पर एक बुद्धिमान दोस्त बन गया। मजबूत शाखाएँ उसकी कहानी सुनती थीं, और नीला आसमान हमेशा उसकी ओर मुस्कुराता था। पीकू हर दिन सीखता था, और हर दिन दूसरों को सिखाता था। उसने सीखा कि सबसे बड़ा जादू धैर्य में है, और सबसे अच्छी सलाह सोचने में है। और वह जानता था कि वह हमेशा खुद से, और दूसरों से प्यार करेगा।
एक दिन, पीकू ने अपनी शाखा पर एक पुरानी, सूखी पत्ती देखी। पत्ती को हवा में उड़ना अच्छा लगता था, लेकिन वह पेड़ से चिपकी हुई थी। वह हिल नहीं पा रही थी। पीकू ने सोचा, "शायद मैं इसकी मदद कर सकूँ।" उसने अपनी चोंच से पत्ती को धीरे से धकेला। 'टप' करके पत्ती नीचे गिरी और हवा में उड़ने लगी। पत्ती बहुत खुश थी। पीकू भी खुश था! उसने सीखा कि कभी-कभी छोटी-छोटी मदद भी बहुत मायने रखती है। उसने सीखा कि हर चीज़ का एक सही समय होता है, और इंतजार करना हमेशा सही परिणाम लाता है। और सबसे महत्वपूर्ण, उसने सीखा कि दोस्ती और दयालुता सबसे बड़ी खुशियाँ लाती हैं। पीकू ने अपनी छोटी सी दुनिया में खुशी और शांति का प्रसार किया।
वह पेड़ पर बैठा हुआ था, अपनी बड़ी आँखों से दुनिया को देख रहा था। सूरज उसके पीले पंखों पर चमक रहा था। उसने एक लंबी, गहरी साँस ली और फिर मुस्कुराया। वह जानता था कि उसके पास शांति है, दया है और बुद्धि है। और यह सब उसे बहुत खुश करता था।