सुनहरे हिरण की चमक
एक खूबसूरत सुनहरे हिरण को देखकर राम और लक्ष्मण की आँखें चमक उठीं। हिरण "फुर्र-फुर्र" करता जंगल में कूद रहा था। राम को हिरण पकड़ना था ताकि सीता खुश हो सके।
पीछे-पीछे जंगल में
राम ने अपने धनुष को उठाया और चुपचाप हिरण के पीछे चलने लगे। लक्ष्मण भी उनके पीछे चुपचाप आए। हिरण "छुप-छुप" करता पत्तों के बीच भाग रहा था।
एक नया रास्ता
हिरण अचानक एक बड़े पत्थर के पीछे "झट से" छिप गया। जब রাম वहाँ पहुँचे, तो हिरण एक और भी गहरे जंगल में घुस गया था जहाँ सूरज की रोशनी कम थी।
जटायु की बातें
जंगल में बहुत अंदर जाने के बाद, राम और लक्ष्मण को एक पहाड़ी पर एक घायल बूढ़ा चील राजा, जटायु, मिला। जटायु की एक पंख टूटी हुई थी। जटायु ने कांपते हुए कहा, "तुम सुनहरे हिरण को नहीं पकड़ सकते, यह मायावी है!"
सुग्रीव का वादा
जटायु ने उन्हें एक वानर राजा सुग्रीव के बारे में बताया, जो उन्हें रास्ता दिखा सकते थे। सुग्रीव समुद्र पार करने में मदद कर सकते थे। राम खुश हुए कि उन्हें मदद मिल सकती है।
सागर की आवाज
जटायु की बात सुनकर, राम और लक्ष्मण तटरेखा पर आ गए। लहरें 'छप-छप' कर चट्टानों से टकरा रही थीं। समुद्री चिड़ियाँ 'चीं-चीं' कर ऊपर उड़ रही थीं।
सुग्रीव की गुफा
बहुत दूर चलने के बाद, राम और लक्ष्मण को एक हरी-भरी पहाड़ी पर सुग्रीव का पता मिला। वे एक बड़ी गुफा के पास आए जहाँ 'धम-धम' की आवाजें आ रही थीं।
