नन्हे खरगोश की गहरी इच्छा
पिंकु नाम का एक नन्हा खरगोश था। उसे गाजर खाना पसंद था। लेकिन उसका सबसे बड़ा सपना चंद्रमा पर जाना था! 'काले आकाश में चमकती चांदी की थाली जैसा दिखता है,' उसने सोचा, 'काश मैं वहाँ जा पाता!'
चमकता पत्थर और चंद्रयान
पिंकु चमकते पत्थर को देखकर बहुत उत्साहित हुआ। उसे लगा कि यह कोई चंद्रयान है! उसने कल्पना की, 'यह ज़रूर मुझे चंद्रमा तक ले जाएगा!' उसने पत्थर को अपनी पीठ पर लाद लिया। यह बहुत भारी था! पिंकु ने पत्थर को लुढ़काने की कोशिश की।
ऊँचा पेड़ और बड़ी छलांग
पिंकु ने एक ऊँचे पेड़ को देखा। 'अगर मैं इस पेड़ पर चढ़ जाऊँ और फिर कूदूँ,' उसने सोचा, 'तो मैं चंद्रमा के करीब पहुँच जाऊँगा!' वह पेड़ पर चढ़ने लगा, पत्तों और टहनियों से होकर गुजरा। ऊपर चढ़ना मुश्किल था!
चंद्रमा का टुकड़ा!
पिंकु ने देखा कि सबसे ऊँची डाली पर एक चमकता हुआ, चांदी जैसा पत्ता फंसा हुआ था। यह पत्ता वैसा ही दिख रहा था जैसा उसने सोचा था कि चंद्रमा का एक टुकड़ा दिखेगा! उसने धीरे से उसे तोड़ लिया। यह कोई चंद्रमा का टुकड़ा नहीं था, लेकिन गुलाबी रंग का एक सुंदर पत्ता था। पिंकु ने उसे अपने पास रख लिया। वह चंद्रमा तक नहीं जा पाया, लेकिन उसे अपने सपने का एक छोटा सा हिस्सा मिल गया था।
नैतिकता और विषय खरगोश का चंद्रमा पर रोमांच
कभी-कभी, हमें जो मिलता है वह हमें जिस चीज़ की तलाश होती है, उससे बेहतर होता है।
कहानी का विषय है सपना देखना और खोज करना
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